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कौन से à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं?
सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठआप जो कà¥à¤› à¤à¥€ खाती या पीती हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤—ॉग कहा जाता है। यह à¤à¤• आम मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि कà¥à¤› विशेष à¤à¥‹à¤œà¤¨ व पेय सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, इस बारे में बहà¥à¤¤ सीमित शोध उपलबà¥à¤§ है और कà¥à¤› मामलों में तो इन पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करने के लिठकोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ नहीं है। मगर, ये खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ कई पीढ़ियों से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को दिठजाते रहे हैं और बहà¥à¤¤ सी मांà¤à¤‚ यह मानती à¤à¥€ हैं कि इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मदद मिली है।
याद रखें कि इन सà¤à¥€ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के हिसà¥à¤¸à¥‡ के तौर पर किया जाना चाहिà¤à¥¤ कोई à¤à¥€ हरà¥à¤¬à¤² वाला या पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक अनà¥à¤ªà¥‚रक (सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट) डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना नहीं लें।
मेथी के बीज
दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठमेथी के बीजों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² विशà¥à¤µ à¤à¤° में कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। इस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ धारणा के समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठकà¥à¤› शोध उपलबà¥à¤§ है, मगर ये इसकी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं है।
मेथी के बीजों में ओमेगा-3 वसा जैसे सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विटामिन होते हैं, जो सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माठके लिठअचà¥à¤›à¥‡ रहते हैं। ओमेगा-3 वसा शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। मेथी के साग में बीटाकैरोटीन, बी विटामिन, आयरन और कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होते है।
मेथी की चाय नई मांओं को दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पेय है। मेथी वैसे à¤à¥€ कई वà¥à¤¯à¤‚जनों में डाली जा सकती है, विशेषकर सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और मांस के वà¥à¤¯à¤‚जनों में। इसे आटे में मिलाकर परांठे, पूरी या à¤à¤°à¤µà¤¾à¤‚ रोटी à¤à¥€ बनाई जा सकती है।
मेथी, पौधों के उसी वरà¥à¤— से संबंध रखती है, जिसमें मूंगफली, छोले और सोयाबीन के पौधे à¤à¥€ शामिल हैं। इसलिà¤, अगर आपको इनमें से किसी के à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो आपको मेथी से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
सौंफ
सौंफ à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने का à¤à¤• अनà¥à¤¯ पारंपरिक उपाय है। शिशॠको गैस और पेट दरà¥à¤¦ की परेशानी से बचाने के लिठà¤à¥€ नई माठको सौंफ दी जाती है। इसके पीछे तरà¥à¤• यह है कि पेट में गड़बड़ या पाचन में सहायता के लिठवयसà¥à¤• लोग सौंफ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं, इसलिठसà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध के जरिये सौंफ के फायदे शिशॠतक पहà¥à¤‚चाने के लिठयह नई माठको दी जाती है। हालांकि, इन दोनों धारणाओं के समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठकोई शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है, मगर बहà¥à¤¤ सी माताà¤à¤‚ मानती हैं कि सौंफ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ या उनके शिशॠको फायदा मिला है।
सौंफ का पानी और सौंफ की चाय पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¤•ांतवास के पारंपरिक पेय हैं।
लहसà¥à¤¨
लहसà¥à¤¨ में बहà¥à¤¤ से रोगनिवारक गà¥à¤£ पाठजाते हैं। यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को फायदा पहà¥à¤‚चाता है और दिल की बीमारियों से बचाता है। इसके साथ-साथ लहसà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤¨ दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ को बढ़ाने में à¤à¥€ सहायक माना गया है। हालांकि, इस बात की पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤•ता के लिठकोई जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है।
अगर, आप बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लहसà¥à¤¨ खाती हैं, तो यह आपके सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और गंध को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। à¤à¤• छोटे अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में पाया गया कि जिन माताओं ने लहसà¥à¤¨ खाया था, उनके शिशà¥à¤“ं ने जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लंबे समय तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ किया। यानि कि हो सकता है शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨ दूध में मौजूद लहसà¥à¤¨ का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ पसंद आà¤à¥¤ हालांकि, यह अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ काफी छोटे सà¥à¤¤à¤° पर था और इससे कोई सारà¥à¤¥à¤• परिणाम नहीं निकाले जा सकते। वहीं, कà¥à¤› माà¤à¤‚ यह à¤à¥€ कहती हैं कि अगर वे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लहसà¥à¤¨ का सेवन करती हैं, तो उनके शिशà¥à¤“ं में पेट दरà¥à¤¦ हो जाता है।
लहसà¥à¤¨ का दूध पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पारंपरिक पेय है।
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग और बथà¥à¤† आदि आयरन, कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® और फोलेट जैस खनिजों का बेहतरीन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। इनमें बीटाकैरोटीन (विटामिन à¤) का à¤à¤• रूप और राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨ जैसे विटामिन à¤à¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤• या दो हिसà¥à¤¸à¥‡ हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खाने की सलाह दी जाती है। आप इन सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मसालों के साथ पका सकती हैं या फिर थेपला, विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ डालकर पोहा या इडली जैसे नाशà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ बना सकती हैं।
जीरा
दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के साथ-साथ माना जाता है कि जीरा पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° और कबà¥à¤œ, अमà¥à¤²à¤¤à¤¾ (à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€) और पेट में फà¥à¤²à¤¾à¤µ से राहत देता है। जीरा बहà¥à¤¤ से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग है और यह कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨ (à¤à¤• बी विटामिन) का सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है।
आप जीरे को à¤à¥‚नकर उसे सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸, रायते और चटनी में डाल सकते हैं। आप इसे जीरे के पानी के रूप में à¤à¥€ पी सकती हैं।
तिल के बीज
तिल के बीज कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का à¤à¤• गैर डेयरी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं के लिठकैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® à¤à¤• जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ है। यह आपके शिशॠके विकास के साथ-साथ आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। शायद इसलिठही यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं के आहार में शामिल की जाने वाली सदियों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सामगà¥à¤°à¥€ है।
आप तिल के लडà¥à¤¡à¥‚ खा सकती हैं या फिर काले तिल को पूरी, खिचड़ी, बिरयानी और दाल के वà¥à¤¯à¤‚जनों में डाल सकती हैं। कà¥à¤› माà¤à¤‚ गजà¥à¤œà¤• व रेवड़ी में सफेद तिल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना पसंद करती हैं।
तà¥à¤²à¤¸à¥€
तà¥à¤²à¤¸à¥€ की चाय सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं का à¤à¤• पारंपरिक पेय है। किसी शोध में यह नहीं बताया गया कि तà¥à¤²à¤¸à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ बढ़ाने में सहायक है, मगर माना जाता है कि इसका à¤à¤• शांतिदायक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होता है। यह मल पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¤à¥€ है और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ को बढ़ावा देती है। मगर, अनà¥à¤¯ जड़ी-बूटियों की तरह ही तà¥à¤²à¤¸à¥€ का सेवन à¤à¥€ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही किया जाना चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤µà¤¾
सà¥à¤µà¤¾ के पतà¥à¤¤à¥‡ आयरन, मैगà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। माना जाता है कि सà¥à¤µà¤¾ सà¥à¤¤à¤¨ दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤°, पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ व वात में आराम और नींद में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है। सà¥à¤µà¤¾ हलà¥à¤•ा मूतà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤• à¤à¥€ होता है, इसलिठइसका सीमित सेवन किया जाना चाहिà¤à¥¤
आप सà¥à¤µà¤¾ के बीज साबà¥à¤¤ या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पीस कर अचार, सलाद, चीज़ सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¡ और तरी या सालन में डाल सकती हैं। सà¥à¤µà¤¾ की चाय पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पेय है।
लौकी व तोरी जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि लौकी, टिंडा और तोरी जैसी à¤à¤• ही वरà¥à¤— की सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करती हैं। ये सà¤à¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ न केवल पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ कम कैलोरी वाली हैं, बलà¥à¤•ि ये आसानी से पच à¤à¥€ जाती हैं।
दालें व दलहनें
दालें, विशेषकर कि मसूर दाल, न केवल सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं, बलà¥à¤•ि ये पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ होती हैं। इनमें आयरन और फाइबर à¤à¥€ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है।
मेवे
माना जाता है कि बादाम और काजू सà¥à¤¤à¤¨ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को बढ़ावा देते हैं। इनमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में कैलोरी, विटामिन और खनिज होते हैं, जिससे ये नई माठको ऊरà¥à¤œà¤¾ व पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ के तौर पर à¤à¥€ खाया जा सकता है और ये हर जगह आसानी से उपलबà¥à¤§ होते हैं।
आप इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध में मिलाकर सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ बादाम दूध या काजू दूध बना सकती हैं। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माठके लिठपंजीरी, लडà¥à¤¡à¥‚ और हलवे जैसे पारंपरिक खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ बनाने में मेवों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
जई और दलिया
जई आयरन, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, फाइबर और बी विटामिन का बेहतरीन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं के बीच ये काफी लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ है। पारंपरिक तौर पर जई को चिंता व अवसाद कम करने में सहायक माना जाता है।
इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आमतौर पर दलिये की तरह ही खाया जाता है। इसका पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• मूलà¥à¤¯ बढ़ाने के लिठआप इसमें मेवे, दूध, मसाले या फल à¤à¥€ डालकर खा सकती हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश से दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में मदद मिलती है?
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश करने से दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ नहीं बढ़ती है। मगर ये निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित मदद कर सकती है:
दूध निकलने की सà¥à¤µà¤¤: ​कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करना
अवरà¥à¤¦à¥à¤§ नलिकाओं को खोलना
नसों के गà¥à¤šà¥à¤›à¥‡ या गांठों और सखà¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को ढीला करना
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की सूजन (मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸) का खतरा à¤à¥€ कम करना
बहरहाल, सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश हलà¥à¤•े हाथों से की जानी चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर बलपूरà¥à¤µà¤• मालिश करने से नलिकाओं को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है, जिससे सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध बाहर निकल सकता है। बेहतर है कि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश आप अपने आप ही करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन पर कितना दबाव डालना है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं बता सकता।
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